मेरी चाहत

चाहत है धुन बजाता,
मन है गीत गुनगुनाता, 
शांत वादियों में भी 
संगीत का आभास पाता, 
तुम्हारी याद ऐसे आती
जैसे कोयल को बसंत सुहाता, 
तुम स्वयं को समझो दूर भले ही, 
लेकिन मेरे दिल में रहती हो, 
तुम मेरे स्वप्नों का श्रृंगार हो, 
तुम मेरे प्रेम का अलंकार हो,
तुम मेरे लिए इस जीवन का
सबसे सुंदरतम् उपहार हो,
अनजाने में प्रेम हुआ, 
अब तुम्हारी चाहत में डूबा रहता हूँ, 
तुम मेरे मन को इतना भा गयी कि
मै मुग्धभाव में विह्वल हूँ, 
जीवन के खालीपन को
तुम्हारी यादों से भर लेता हूँ, 
तुम मेरे जीवन में मधुबसंत 
बनकर आ जाओ, 
मै आश लगाए हूँ।

   ___राजेश मिश्रा_

Comments

Rajesh Mishra Thought Media

भारत में ईसाई, मुस्लिम, और भिमटा बौद्ध नेताओं द्वारा सनातन हिन्दू धर्म को खत्म करने की बात -