प्रणय आतुरता

प्रणय मिलन को आतुर मन
तृषित नयन से 
देख रहा है उनका राह, 
मन में है मेरे 
उनसे प्रणय निवेदन की चाह, 
प्रणय ही है मेरी अभिलाषा,
प्रणय ही है मेरी प्रत्याशा, 
प्रणय ही है मेरा प्रस्ताव,
मन में है मेरे 
केवल प्रणय का भाव, 
प्रणय व्यथा से व्यथित हृदय का
हाल किसे सुनाऊँ मै, 
विरह वेदना का संदेश 
कैसे उन्हें बताऊं मै? 
मन आतुर है मेरा
उनका अभिनंदन करने को, 
कैसे उन्हें सुनाऊं
अपने व्याकुल हृदय के आहों को? 
कैसे उन्हें बताऊं 
मन में कितने सुन्दर स्वप्न सजे है? 
मेरे सपने उनका 
राह निरंतर देख रहे हैं, 
उनके विना यह जीवन है संत्रास, 
कैसे उन्हें कराऊँ 
अपने प्रणय का आभास? 
सोच रहा हूँ कैसे मिलेगा 
उनसे प्रणय अनुदान? 
कैसे मांगू मै 
उनसे प्रणय प्रतिदान? 

   ___राजेश मिश्रा_



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Rajesh Mishra Thought Media

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