सवर्ण समाज के आम लोग बेचारे क्यों?
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सवर्ण समाज के आम लोग बेचारे क्यों?
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*नये यूजीसी एक्ट का सवर्ण समाज विरोध कर रहा है। सवर्ण समाज के बड़े-बड़े नेता चुप्पी साधे हुए है। जिससे सवर्ण समाज अपने समाज के नेताओं से छुब्ध है। नये यूजीसी एक्ट पर मौन रहने वाले सवर्ण समाज के नेता अपना राजनीतिक भविष्य अपने-अपने हिसाब से सुरक्षित करके कुर्सी और सत्ता की मलाई का मजा लेना चाहते है। भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी सहित सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रमुख सवर्ण नेता खामोश है। कुछ सवर्ण नेताओं ने नये यूजीसी एक्ट का विरोध किया है, लेकिन उनका राजनीतिक वजूद कम है।
*भारतीय जनता पार्टी के सरकार के संरक्षण में नये यूजीसी एक्ट बनाने वाले समिति में 30 सदस्य भारतीय जनता पार्टी सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों से थे। इसमें 17 सदस्य सवर्ण वर्ग से थे। इस समिति के अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पुर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह थे। दिग्विजय सिंह सवर्ण वर्ग से ही है। सवर्ण वर्गों के प्रतिनिधियों के मौजूदगी में ही एक सवर्ण विरोधी कानून बनाया गया है तो सवर्ण वर्ग दुसरे को क्या दोष देगा। सवर्णों को सबसे बड़ा दुश्मन सवर्ण ही है।
*इसी तरह 7 अगस्त 1990 को तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह द्वारा मंडल कमीशन की सिफारिश को आधिकारिक रूप से लागू किया गया था। जिसके तहत सरकारी नौकरियों में तथाकथित ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण दिया गया। इस निर्णय से पहले, नौकरियों में केवल एसी वर्ग के लिए 15% और एसटी वर्ग के लिए 7.5%, यानी कुल 22.5% आरक्षण लागू था। विश्वनाथ प्रताप सिंह सवर्ण ही थे। धीरे-धीरे आरक्षण की ब्यवस्था शिक्षा, नौकरी, नौकरी में पदोन्नति और जनप्रतिनिधि चुनाव में भी लागू हो गया है। अब इसे जनसंख्या के अनुपात में बढ़ाने की मांग हो रही है। आरक्षण की ब्यवस्था ने प्रतिभा को कुचलने और दमन करने का कार्य किया है।
*बहुजन समाज पार्टी मुख्यरूप से एससी वर्ग की राजनीतिक पार्टी है और वोट बैंक की राजनीति में ओबीसी वर्ग और मुसलमानों को महत्व देती हैं। यह पार्टी सवर्ण विरोधी विचारधारा से बनी है, और इसको सनातन हिन्दू विरोधी राजनीति से परहेज नही है। इस पार्टी की सुप्रीमो मायावती एससी वर्ग से है। इन्होन नये यूजीसी एक्ट का समर्थन करके ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग के साथ खड़े रहने का संदेश दिया है।
*समाजवादी पार्टी मुख्यरूप से ओबीसी वर्ग की राजनीतिक पार्टी है और वोट बैंक की राजनीति में मुसलमानों और एससी-एसटी वर्ग को महत्व देती है। इसको सवर्ण विरोधी और सनातन हिन्दू विरोधी राजनीतिक से परहेज नही है। इसके सुप्रीमो अखिलेश यादव ने नये यूजीसी एक्ट पर केवल इधर-उधर की बात करके और नये यूजीसी एक्ट का विरोध न करके ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग के साथ खड़े रहने का संकेत दिया है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और नितिकार, अखिलेश यादव के चाचा राम गोपाल यादव ने तो सवर्णो से अपना नफरत यह कह कर प्रदर्शित किया है कि नये यूजीसी एक्ट में यदि सवर्णों के विरूद्ध जांच में झूठी शिकायत पायी जाती है तो क्या फर्क पड़ता है।
*राष्ट्रीय जनता दल मुख्यरूप से ओबीसी वर्ग की राजनीतिक पार्टी है और वोट बैंक की राजनीति में मुसलमानों और एससी-एसटी वर्ग को महत्व देती है। इसको सवर्ण विरोधी और सनातन हिन्दू विरोधी राजनीतिक से परहेज नही है। यह लालू यादव की पार्टी है और इसकी विरासत लालू यादव के पुत्र तेजस्वी यादव सभाल रहे है। इस पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता कंचना यादव जेएनयू से पीएचडी स्कालर हैं। कंचना यादव का कहना है कि सवर्णों को झुठे मुकद्दमों में फंसाया जाना चाहिए।
*तथाकथित ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग के सभी नेताओं नें नये यूजीसी एक्ट का किसी न किसी तरह से समर्थन करके अपने-अपने समाज का साथ दिया है। लेकिन सवर्ण वर्ग ने नेताओ ने नये यूजीसी एक्ट पर चुप्पी साध के अपने समाज का साथ नही दिया है।
*सवर्ण समाज के आम लोगों विचार करो तुम्हारा कौन है और तुम्हें क्या मिल रहा है?
*वोट बैंक की राजनीति में सारा खेल आबादी/जनसंख्या का है। तथाकथित ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग अपनी आबादी 90% बताता हैं और वर्ग 10% आबादी वाले सवर्ण वर्ग पर शोषण और उत्पीड़न का आरोप लगा रहा है। इसका कारण केवल राजनीतिक है। भारत में तथाकथित ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग से प्रधानमंत्री है, राष्टपति है, लोकसभा अध्यक्ष हैं, सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री हैं, सबसे ज्यादा सांसद, विधायक और सबसे ज्यादा जनप्रतिनिधि है और इस वर्ग का कहना है इनका शोषण और उत्पीड़न हो रहा है। भारत में तथाकथित ओबीसी और एससी-एसटी करोड़पति और अरबपति हैं। भारत में तथाकथित ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग में शामिल होने के लिए लोग आंदोलन करते है। भारत में तथाकथित ओबीसी और एससी-एसटी अपनी आबादी की शक्ति दिखाकर आरक्षण के बल पर हर जगह काबिज हैं। यदि सवर्ण वर्ग कहीं काबिज है तो केवल अपनी प्रतिभा के बल पर। सवर्ण वर्ग की आबादी कम होने के कारण हासिये पर है और इससे सब कुछ छिनता चला जा रहा है। ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग का कहना है "जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी"। सवर्ण वर्ग अच्छी और आराम की जिंदगी जिने के लिए अपना परिवार छोटा करता जा रहा है और एक दिन ऐसा आयेगा कि सवर्ण वर्ग की आबादी किसी से लड़ने लायक ही नही बचेगा और सवर्ण वर्ग का सब कुछ लुट जायेगा तथा कोई शरण भी नही देगा।
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