सनातन हिन्दू धर्म में जाति ब्यवस्था का कारण

                  सनातन हिन्दू धर्म में छुआछूत, ऊंच-नीच और जाति ब्यवस्था पुर्व में कभी नही रहा है। सनातन हिन्दू धर्म में कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था थी। कर्म के आधार पर कोई भी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र हो सकता था। सनातन हिन्दू धर्म में पुर्व में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र केवल चार वर्ण थे, लेकिन आज हजारों जातियां षड्यंत्र के तहत बना दी गई है। मध्यकाल में आक्रान्ता मुसलमानो द्वारा शासन ब्यवस्था स्थापित करने के बाद मुसलमानों के शासन के दौरान मुसलमानों द्वारा सनातन हिन्दू धर्म में वर्ण ब्यवस्था को जाति ब्यवस्था में परिवर्तित कर दी गयी और मुस्लिम शासन ब्यवस्था के कारण जाती-पात और छुआछूत पैदा हुई। फिर उसके बाद अग्रेजों के शासन में "बांटो और राज करो" के नीति से सनातन हिन्दू धर्म और समाज को विभिन्न सम्प्रदायों, पंत और मत तथा जातीगत ऊंच-नीच में बांटा गया। बाद में और वर्तमान में जाति ब्यवस्था अपने आपको पिछड़ा और दलित कहने वाले करोड़पति व अरबपति राजनेताओ की देन है। 

___राजेश मिश्रा_ 

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